कुछ मेरे बारे में

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आईज़ोल, मिज़ोरम, भारत
अब अपने बारे में मैं क्या बताऊँ, मैं कोई भीड़ से अलग शख्सियत तो हूँ नहीं। मेरी पहचान उतनी ही है जितनी आप की होगी, या शायद उससे भी कम। और आज के जमाने में किसको फुरसत है भीड़ में खड़े आदमी को जानने की। तो भईया, अगर आप सच में मुझे जानना चाहते हैं तो बस आईने में खुद के अक्स में छिपे इंसान को पहचानने कि कोशिश कीजिए, शायद वो मेरे जैसा ही हो!!!

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गुरुवार, 1 अक्तूबर 2009

१ बार मुस्कुरा २

एक अमीर लड़की को विद्यालय में गरीब परिवार पे लेख लिखने को कहा गया.

लेख :

एक गरीब परीवार था, पिता गरीब, माँ गरीब, बच्चे गरीब| परीवार में 4 नौकर थे, वोह भी गरीब| SCORPIO कार
भी टूटी हुई थी | उनका गरीब वाहन चालक बच्चों को उसी टूटी कार में विद्यालय छोड़ के आता था| बच्चों के पास पुराने N95 मोबाइल था | बच्चे हफ्ते में सीर्फ 3 बार ही होटल में खाते थे| घर में केवल चार 2nd Hand A.C. थे.
सारा परीवार बड़ी मुश्कील से ऐश कर रहा था

1 टिप्पणी:

  1. बहुत खूब, गरीबी की अपनी अपनी परिभाषा है...
    ब्लॉग पर पधारने के लिये ध्न्यवाद

    अवतार मेहेर बाबा जी की जय
    आपका ही चन्दर मेहेर्

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