कुछ मेरे बारे में

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आईज़ोल, मिज़ोरम, भारत
अब अपने बारे में मैं क्या बताऊँ, मैं कोई भीड़ से अलग शख्सियत तो हूँ नहीं। मेरी पहचान उतनी ही है जितनी आप की होगी, या शायद उससे भी कम। और आज के जमाने में किसको फुरसत है भीड़ में खड़े आदमी को जानने की। तो भईया, अगर आप सच में मुझे जानना चाहते हैं तो बस आईने में खुद के अक्स में छिपे इंसान को पहचानने कि कोशिश कीजिए, शायद वो मेरे जैसा ही हो!!!

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रविवार, 5 सितंबर 2010

शिक्षक और शिक्षा

आईए आज के इस शुभ अवसर पर हम यह भी विचार करते हैं कि शिक्षक कौन है? मेरे विचार से हम जिससे कोई शिक्षा ग्रहण कर सकें, वही शिक्षक है। मुझे इस संसार में ऐसा कुछ नहीं दिखता जिससे हम कुछ-न-कुछ शिक्षा ग्रहण न कर सकें । चाहे वह जड़ हो या चेतन । राजा हो या रंक । छोटा हो या बड़ा । लेकिन ...... कोई भी शिक्षा लेना हो तो पहले हमें खुद को शिक्षा ग्रहण करने के काबिल बनाना होगा ।
अगर इस जगत में सभी से कुछ सीखा जा सकता है, अगर सभी में शिक्षक के गुण हैं तो हममें भी उअह गुण अवश्य होंगे ! तब क्यों न सबसे पहले हम अपने अन्दर के शिक्षक को जगाएं? अगर हम खुद से शिक्षा ले सकें तो यह सबसे अच्छा होगा । तो आईए आज के दिन हम अपनें अन्दर के सोए हुए शिक्षक को जगाएं !! मुझे विश्वास है कि एक शिक्षक कोई गलत काम नहीं करता, यदि ऐसा है, तो क्या यह हमारे सभी समस्याओं का समाधान नहीं होगा?  
शिक्षक दिवस पर हम संसार में फैले कुरितियों से (और उससे पहले, अपने अन्दर के कुरितियोँ से) इस संसार को आज़ाद कराते हैं ।

2 टिप्‍पणियां:

  1. तो आईए आज के दिन हम अपनें अन्दर के सोए हुए शिक्षक को जगाएं !!
    bahut sundar aur saargarbhit wakya. Puri rachna ka aur yadi vistaar me jaaye to poore jeewan ka 'aadhar waakya' hai yah pankti. Badhai aur thaks...

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  2. श्री तिवारी जी, आपका ब्लाग पर स्वागत है। आपको यह पन्क्ति पसन्द आई, यह ज्यादा सुख दायक है। मनोबल बढाने तथा प्रेरणा देने के लिए धन्यवाद ।

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