कुछ मेरे बारे में
- भारतेन्दु
- आईज़ोल, मिज़ोरम, भारत
- अब अपने बारे में मैं क्या बताऊँ, मैं कोई भीड़ से अलग शख्सियत तो हूँ नहीं। मेरी पहचान उतनी ही है जितनी आप की होगी, या शायद उससे भी कम। और आज के जमाने में किसको फुरसत है भीड़ में खड़े आदमी को जानने की। तो भईया, अगर आप सच में मुझे जानना चाहते हैं तो बस आईने में खुद के अक्स में छिपे इंसान को पहचानने कि कोशिश कीजिए, शायद वो मेरे जैसा ही हो!!!
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गुरुवार, 9 सितंबर 2010
महात्मा गांधी ने कहा था
सोमवार, 6 सितंबर 2010
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